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हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (सहायता) - एक विन-विन दृष्टिकोण
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हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति (सहायता) - एक विन-विन दृष्टिकोण

हाइड्रोकार्बन अन्‍वेषण और लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी) – सकारात्‍मक दृष्‍टिकोण

2022 तक हाइड्रोकार्बन आयात निर्भरता को 10% तक कम करने के विजन के साथ भारतीय तलछटीय बेसिनों में तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाने के स्पष्ट उद्देश्य के साथ हाइड्रोकार्बन अन्‍वेषण और लाइसेंसिंग नीति (एचईएलपी)शुरू की गई थी।

यह नीति राजस्‍व हिस्‍सेदारी संविदा (आरएससी) के नए मॉडल पर आधारित है  जिसे उत्‍पादन हिस्‍सेदारी संविदा (पीएसएस) के पहले के मॉडल को बदल कर लाया गया है। एचईएलपी के तहत  खुला रकबा लाइसेंसिंग (ओएएल) व्‍यवस्‍था शुरू की गई है जिसमें निवेशकों को  निवेशकों को एनडीआर में उपलब्ध अन्‍वेषण और उत्‍पादन के आंकड़ों का आकलन करके और अपनी रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) प्रस्‍तुत करके अपनी पसंद के ब्लॉक तैयार करने  की अनुमति दी गई है। ईओआई सरकार से औपचारिक बोली दौर की प्रतीक्षा किए बिना वर्ष भर प्रस्तुत की जा सकती है। इन ब्लॉकों की पेशकश बाद में औपचारिक छ:माही बोली प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। ओएएल को नेशनल डेटा रिपॉजिटरी के माध्यम से सामने लाया जाएगा जिससे देश के संपूर्ण जी एंड जी आंकड़े व्याख्या और विश्लेषण के लिए निर्बाध रुप से उपलब्‍ध होंगे और इससे अन्‍वेषण और उत्‍पादन संबंधी कार्यकलापों में ख़ासी तेजी आएगी। एचईएलपी की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हैं:
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     एकल लाइसेंस जो सभी प्रकार के हाइड्रोकार्बनों अर्थात पारंपरिक तेल और गैस, कोल बैड मिथेन, शेल तेल, गैस हाइड्रेट आदि के अन्वेषण और उत्पादन को कवर करेगा। 
     राजस्व हिस्‍सेदारी मॉडल: सरल, निगरानी करना आसान; सरकारी राजस्व और संविदाकार के उत्पादन के लिए केवल दो निगरानी पैरामीटर, कोई लागत वसूली नहीं; सरकार द्वारा कोई सूक्ष्म प्रबंधन नहीं; प्रचालनीय तथा संभावित निवेशकों/कंपनियों को अपनी पसंद के रकबे तैयार करने और रुचि की अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने की अनुमति, जिसे सरकार प्रतिस्पर्धी बोलियों के लिए मांगेगी।

     कम और वर्गीकृत रॉयल्टी दरें। गहरे समुद्री और अत्‍यधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों में अन्वेषण को प्रोत्साहित करने के लिए रॉयल्टी को पहले सात वर्षों के लिए माफ कर दिया गया था (और बाद में 5% और 2% की रॉयल्टी गहरे समुद्री और अत्‍यधिक गहरे समुद्री क्षेत्रों में लागू थी)

     अन्य राजकोषीय प्रोत्साहन अर्थात कच्चे तेल पर उपकर तथा अन्वेषण और उत्पादन संबंधी कार्यकलापों के लिए उपकरणों/सेवाओं पर लागू सीमा शुल्‍क माफ।

     आर्म्स लेंथ आधार पर उत्पादित गैस के विपणन और मूल्य निर्धारण की पूरी आज़ादी।

     अन्वेषण और उत्पादन के लिए बढ़ाई गई अवधि अर्थात ज़मीनी/उथले समुद्री क्षेत्रों के लिए 8 वर्ष और गहरे समुद्री/सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए 10 वर्ष।

     इच्छुक ईएंडपी और ऑयल फील्ड सर्विसेज (ओएफएस) कंपनियों को पूर्वेक्षण संविदा (आरसी) का विकल्प प्रदान करना। एक पूर्वेक्षण संविदा में इच्‍छुक कंपनियों को अन्वेषण कार्यकलापों, भूकंपीय सर्वेक्षण और अन्‍वेषणात्‍मक वेधन करने की अनुमति होती है और अन्‍वेषण तथा उत्‍पादन आंकड़े एकत्र करने और उन्‍हें प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के अधीन विकास और उत्पादन के लिए माइग्रेट करने के विकल्‍प के साथ 12 वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर देने का विशेष अधिकार होता है।

     प्रतिबद्ध कार्य कार्यक्रम में किसी भी कमी के लिए पहले से निर्धारित परिनिर्धारित नुकसान (एलडीज)।

और अधिक ब्‍यौरों के लिए हमारी वार्षिक रिपोर्ट देखें…

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