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बायो ईंधन के बारे में

क्‍या मंत्रालय/ओएमसीज हरित ईंधनों की बाजार पैठ बढ़ाने के लिए कोई कदम उठा रहे हैं?

सरकार ने आयात निर्भरता अर्थात जीवाश्म ईंधन के उपयोग में कमी करने के लक्ष्य के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने पर जोर दिया है। पर्यावरण प्रदूषण के मुद्दों और ईंधन की आवश्यकता के लिए आयात पर निर्भरता के बारे में बढ़ती चिंता के कारण वैकल्पिक ईंधन की आवश्यकता है जिनके  पर्यावरण संबंधी बेहतर लाभ हैं और जीवाश्म ईंधन की तुलना में आर्थिक दृष्‍टि से प्रतिस्पर्धी हैं। इसमें ऊर्जा की भारतीय बास्‍केट में जैव ईंधन के लिए एक कार्यनीतिक भूमिका की परिकल्पना की गई है। इन संसाधनों में कृषि और वन अवशेष, नगर पालिका ठोस अपशिष्‍ट (एमएसडब्‍ल्‍यू), गोबर आदि शामिल हैं जिन्हें जैव ईंधन के उत्‍पादन हेतु इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार कच्चे तेल के आयात पर हमारी निर्भरता को कम करने, विदेशी मुद्रा की बचत करने के उद्देश्य से इनका उपयोग करने, किसानों को उनकी आय दोगुनी करने के लिए बेहतर पारिश्रमिक प्रदान करने, जीवाश्म ईंधन के उपयोग के कारण बढ़ते पर्यावरण के मुद्दों का समाधान करने/बायोमास/अपशिष्‍ट को जलाने, स्वच्छ भारत अभियान के अनुरूप अपशिष्‍ट प्रबंधन/कृषि-अवशेष प्रबंधन की चुनौतियों का समाधान करने और “मेक इन इंडिया” अभियान को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है ।

क.    एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम

1.    सरकार केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप द्वीप समूह को छोड़कर पूरे देश में एथेनॉल मिश्रित मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम कार्यान्‍वित कर रही है जिसमें ओएूसीज 10% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री करती हैं।

2. एथेनॉल का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2014 से कई उपाय किए:
o प्रशासित मूल्य व्‍यवस्‍था पुन: शुरू करना;
o एथेनॉल उत्पादन के लिए वैकल्पिक रूट शुरू करना;
o उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 में संशोधन, जो देश भर में एथेनॉल की आसान ढुलाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा विकृत एथेनॉल को नियंत्रित करता है;

o ईबीपी कार्यक्रम के लिए एथेनॉल पर माल और सेवा कर (जीएसटी) 18% से घटा कर 5% किया गया है;
o एथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के आधार पर एथेनॉल का अंतरीय मूल्‍य;
o 01 अप्रैल, 2019 से अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप के द्वीपों को छोड़कर पूरे भारत में ईबीपी कार्यक्रम लागू होगा;
o खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) द्वारा एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए ब्याज इमदाद योजना;
o एथेनॉल अधिप्राप्‍ति संबंधी दीर्घकालिक नीति का प्रकाशन।

3. एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2018-19 के दौरान पहली बार  एथेनॉल उत्पादन के लिए सी हैवी शीरे के अलावा निम्‍नलिखित कच्चे माल अर्थात बी हैवी शीरे, गन्ने का रस, चीनी, चीनी सीरप, क्षतिग्रस्त अनाज जैसे मानवीय उपभोग के लिए अनुपयुक्‍त गेहूं और चावल आदि के उपयोग की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा,  सरकार द्वारा एथेनॉल उत्पादन के लिए प्रयुक्‍त कच्चे माल के आधार पर गन्ने का रस/चीनी/चीनी सीरप, बी हैवी शीरे और सी हैवी शीरे के मामले में एथेनॉल का अलग-अलग एक्‍स मिल मूल्‍य तय किया गया था।

4. उपर्युक्‍त उपायों से एथनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2013-14 (दिसंबर, 2013 से नवंबर, 2014) के दौरान पीएसयू ओएमसीज द्वारा एथेनॉलकी अधिप्राप्‍ति  को 38 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 2018-19 (दिसंबर, 2018 से नवंबर, 2019) के दौरान 188.6 करोड़ लीटर करने और ईएसवाई 2018-19 में 5.00% का औसत मिश्रण प्रतिशत का लक्ष्‍य हासिल करने में मदद मिली।

5. ईबीपी कार्यक्रम के तहत चल रही ईएसवाई 2019-20 (दिसंबर, 2019 से नवंबर, 2020) के लिए लक्ष्य 7% है जिसे ईएसवाई 2021-22 तक प्रगामी रूप से 10% तक बढ़ाया जाना है।

6. चल रही ईएसवाई 2019-20 के दौरान कम पेशकश/आपूर्ति के बताए गए मुख्य कारणों में महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल का उत्पादन कम होना, ऐसी नई आसवनियों, जिन्होंने निविदा में भाग लिया था द्वारा उत्पादन शुरू नहीं करना आदि शामिल हैं।
7. वर्ष 2021-22 तक पेट्रोल में 10% और 2030 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्‍य प्राप्त करने की दृष्टि से उपलब्ध एथेनॉल आसवन क्षमता में कमी को कार्रवाई योग्‍य बिंदुओं में से एक के रूप में पहचाना गया था। एथेनॉल आसवन क्षमता की कमी को दूर करने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने 19 जुलाई, 2018 को एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक योजना को अधिसूचित किया।

8. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने दिनांक 11.10.2019 को ईबीपी कार्यक्रम के तहत ‘दीर्घकालिक एथेनॉल अधिप्राप्‍ति नीति’ जारी की है।


ख    दूसरी पीढ़ी (2जी) एथेनॉल


9. एथेनॉल की आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने शीरे के अलावा पेट्रोरसायन रूट सहित सेल्युलोसिक और लिग्नोसेल्यूलोसिक सामग्री जैसे अन्य गैर-खाद्य फीडस्टॉक से उत्पादित एथेनॉल की अधिप्राप्‍ति की अनुमति दी। तेल पीएसयूज ने देश के विभिन्न हिस्सों में 2जी एथेनॉल जैव-रिफाइनरियों की स्थापना की योजना बनाई है। 

10. इसके अलावा, सरकार ने देश में 2जी एथेनॉल क्षमता निर्माण के लिए प्रारंभिक मद प्रदान करने और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिए व्यवहार्यता में कमी संबंधी निधीयन करने के लिए “प्रधान मंत्री जी-वन (जैव ईंधन- वावरण अनुकुल फसल अवशेष निवारण) योजना” शुरू की है। इस योजना में वर्ष 2018-19 से 2023-24 की अवधि के लिए 1969.50 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय परिव्यय से लिग्‍नोसेल्‍यूलॉसिक बायोमास और अन्य नवीकरणीय फीडस्टॉक का उपयोग कने वाली बारह एकीकृत जैव-एथेनॉल परियोजनाओं को वित्तीय सहायता।

ग.    जैव डीजल मिश्रण कार्यक्रम 

12. पेटोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जैव डीजल अधिप्राप्‍ति नीति की घोषणा की जो 1 जनवरी 2006 से लागू हो गई। सरकार ने दिनांक 10.08.2015 को रेलवे, राज्य सड़क परिवहन निगम जैसे थोक उपभोक्ताओं को डीजल के साथ मिश्रित करने के लिए जैव डीजल (बी100) की सीधी बिक्री की अनुमति दे दी। दिनांक 29.06.2017 को सरकार ने डीजल के साथ मिश्रण के लिए सभी उपभोक्ताओं को जैव डीजल की बिक्री की अनुमति दे दी।

13. सरकार ने दिनांक 30.4.2019 को परिवहन के लिए हाई स्पीड डीजल के साथ मिश्रण हेतु जैव डीजल की बिक्री के लिए दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया है। इस अधिसूचना के माध्यम से सरकार ने केवल जैव डीजल  (बी-100) की बिक्री के लिए विशेष रूप से अनुमति दी है और जो किसी भी प्रतिशत के मिश्रण के लिए नहीं है।
 
14. ओएमसीज द्वारा जैव डीजल की अधिप्राप्‍ति वर्ष 2019-20 के दौरान 10.56 करोड़ लीटर हो गई।

15. वर्तमान में देश में मुख्य रूप से आयातित पाम स्टिरिन तेल से जैव-डीजल का उत्पादन किया जा रहा है। स्टिरिन का उपयोग बंद करने और आयात प्रतिस्थापन के एक उपाय के रूप में फीडस्टॉक के रूप में घरेलू रूप से उपलब्ध प्रयुक्‍त खाद्य तेल (यूसीओ) को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।

16. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति -2018 में जैव डीजल के उत्पादन के लिए यूसीओ को एक संभावित कच्चे माल के रूप में पहचाना गया है। जैव डीजल के उत्पादन के लिए यूसीओ होटल, रेस्तरां, कैंटीन आदि जैसे थोक उपभोक्ताओं से एकत्र किया जा सकता है।

17. तेल विपणन कंपनियों (ओएमसीज) ने देश में 200 स्थानों पर यूसीओ से उत्पादित जैव डीजल  की अधिप्राप्‍ति के लिए रुचि की अभिव्‍यक्‍ति (ईओआई) मंगाई है। 10.9.2020 तक ओएमसीज  ने यूसीओ आधारित जैव डीजल  के 522 टीपीडी की कुल उत्पादन क्षमता वाले 22 संयंत्रों के लिए आशय पत्र जारी किए हैं।

घ.      संपीड़ित जैव-गैस

(i) देश में विभिन्न अपशिष्ट/बायोमास स्रोतों से संपीडित बायो गैस (सीबीजी) के उत्पादन के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के उद्देश्य से दिनांक 1 अक्‍तूबर 2018 को किफायती परिवहन के लिए दीर्घकालिक विकल्‍प (सतत) पहल शुरू की गई थी।
(ii) सतत के तहत तेल और गैस विपणन कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल, गेल और आईजीएल ने आगे के विपणन के लिए संभावित उद्यमियों से सीबीजी  की अधिप्राप्‍ति के लिए अभिव्यक्ति की रुचि (ईओआई) आमंत्रित की है।
(iii) सतत को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय द्वारा हाल ही में की गई पहलों की सूची निम्‍नानुसार है:
क) तेल और गैस विपणन कंपनियां एक सुनिश्चित मूल्य पर सीबीजी के ऑफ-टेक के लिए दीर्घकालिक करार कर रही हैं।
ख) सीबीजी संयंत्रों से उत्पादित जैव खाद को उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत दिनांक 13 जुलाई 2020 की राजपत्र अधिसूचना द्वारा  "किण्वित जैविक खाद" के रूप में शामिल किया गया है। 
ग) भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों को दिनांक 4.9.2020 के निर्देशों द्वारा ऋण के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सीबीजी परियोजनाओं को शामिल करने को अधिसूचित किया है।
घ) भारतीय स्टेट बैंक ने सीबीजी परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक नया ऋण भी विकसित किया है।
ड.) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) योजना का विस्तार किया है।
च) हरियाणा और पंजाब राज्यों में सतत पहल के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समितियों का गठन किया गया है
छ) पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय सीबीजी डेवलपर्स के लिए लाइन ऑफ क्रैडिट के माध्यम से वित्तपोषण के विकल्पों उपलब्‍ध करवाने के लिए विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) आदि बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के साथ बातचीत कर रहा है।

(iv) इसके अलावा मंत्रालय निम्‍नलिखित के साथ काम कर रहा है:
क) कम से कम 10 वर्षों के लिए स्थिर मूल्य पर बायो मास की सतत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बायो मास आपूर्ति श्रृंखला की स्थापना हेतु कारगर व्‍यवस्‍था तैयार करने के लिए राज्य सरकार।
ख) एफसीओ के तहत सीबीजी परियोजनाओं से उत्पादित डाइजेस्टेड बायो गैस स्लरी (डीबीजीएस) को शामिल करने के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ।
सी) 'सफेद श्रेणी' के तहत सीबीजी परियोजनाओं को वर्गीकृत करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
घ) उर्वरकों के साथ एफओएम का विपणन करने के लिए एफओएम तथा प्रत्यक्ष उर्वरक कंपनियों और विपणन कंपनियों को 1500 रुपए/टन के रूप में बाजार विकास सहायता के लाभ प्रदान करने के लिए उर्वरक विभाग।
ड.) सीबीजी परियोजनाओं के लिए बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों से वित्त पोषण की वरूवस्‍था तैयार करने के लिए आर्थिक कार्य विभाग।

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